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आईएमए की गोरखपुर शाखा ने मीडिया की निष्पक्षता पर खड़े किए सवाल

सच्चाई : मीडिया की खबरों से ही गरीबो व असहायों का होता है भला

मनव्वर रिज़वी

गोरखपुर । मंगलवार को भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष, सचिव व अन्य पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर इलाज के दौरान होने वाली मौतों के बाद अस्पतालों में होने वाली तोड़फोड़ के लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहरा दिया और लगे हाथ नसीहत भी दे डाली। हालांकि आईएमए ने मीडिया को समाज का आईना तो माना लेकिन बावजूद इसके मीडिया को एक पक्षीय बताने में कोई कसर भी नही छोड़ी। वैसे भी हर बड़ी घटना के बाद मीडिया पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। बताते चलें कि अगर मीडिया गरीबों और असहायों की आवाज़ न बने तो उनके हक़ पर डाका डालने वाले उनके जिस्म पर कपड़े भी न छोड़ें। अभी कल ही बीआरडी मेडिकल कालेज में डॉक्टर की शह पर मरीज़ के परिजनों को गार्ड द्वारा पीटे जाने की वीडियो वायरल हुआ और मीडिया द्वारा उस सच्चाई को लोगों तक पहुंचाया भी गया। इसी तरह पिछले दिनों शहर के एक निजी नर्सिंग होम में मरीज की मौत के बाद परिजनों और अस्पताल के लोगों के बीच हुई मार पीट की निष्पक्ष कवरेज मीडिया द्वारा की गई। बहरहाल अपने को पाक, साफ, ईमानदार, गरीब असहाय का मसीहा बताने वाले दूसरे प्रोफेशनल्स की तुलना में तमाम आरोपों और विषम परिस्थितियों के बावजूद पत्रकार आज भी ईमानदार हैं और लोगों का भरोसा मीडिया पर अभी भी कायम है। मीडिया में खबरे आने भर से गरीबों व असहायों को न्याय मिलने में आसानी हो जाती है और उनका भला हो जाता है। विडम्बना यह है कि कलम चला कर दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लगातार लिखने वाले पत्रकार पूरी जिंदगी मेहनत करके शायद अपना एक घर ही बना पाता हो लेकिन दूसरी ओर महज 4 से 5 सालों में ही सेवा के नाम पर दूसरों के दर्द पर कमीशन पाने वाला एक वर्ग विशेष, करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन जा रहा है। यकीन जानिए अगर मीडिया तमाम पैथालॉजी और अस्पतालों व इनके संचालको के बारे में लिखने पर उतारू हो जाये तो दूसरों को नसीहत देने वाले और कुछ ही सालों में किराए की क्लिनिक से खुद का आलीशान हास्पिटल बना लेने वाले अधिकांश लोग कटघरे में खड़े नज़र आएंगे।

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