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गोरखपुर साहित्य समागम का हुआ समापन, परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव रहे मुख्य आकर्षण

हथियार तो माध्यम है लड़ाई विचारों की होती हैं : योगेंद्र यादव

बचपन में पढ़े साहित्य ने सेना में जानें की प्रेरणा दी : परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव

गोरखपुर साहित्य समागम मील का पत्थर साबित होगा : शिव प्रताप शुक्ला

गोरखपुर। शहर के गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में हर्षवर्धन फाउंडेशन के तत्वाधान में चल रहे दो दिवसीय गोरखपुर साहित्य समागम के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। गीता प्रेस का संचालन कर रहे डॉ लालमनी तिवारी और परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव ने समागम की उपयोगिता को सिद्ध कर दिया। पांच सत्रों, पुस्तक विमोचनों और आकर्षक पाण्डालों से सजे संवाद भवन की शोभा उस समय वास्तविक परीसंवाद में बदल गई जब शाम को कवि सम्मलेन तथा मुशायरे में देश की मशहूर हस्तियों ने काव्य पाठ किया।
गोरखपुर साहित्य समागम के दूसरे दिन रविवार को राष्ट्रगान से देश के अनूठे साहित्य समागम का आरम्भ हुआ। पहले सत्र में भारतीय भाषा को शामिल करते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में बंगाल के साहित्यकारों व समाज सुधारकों के योगदान पर डॉ राम कुमार मुखोपाध्याय और डॉ पी के लहरी उद्बोधन प्रस्तुत किए।
दूसरे सत्र में गीता प्रेस: हिन्दी साहित्य बनाम हिन्दू साहित्य, सुलभ हिन्दी साहित्य में गीता प्रेस का योगदान विषय पर परिचर्चा में लालमनी तिवारी व महेश चन्द्र शर्मा ने भाग लिया और संचालन डॉ फूलचन्द प्रसाद गुप्ता ने किया। डॉ तिवारी ने कहा कि गीता प्रेस पर कोई आर्थिक संकट नहीं है और ऐसा षड्यंत्र के तहत बदनाम करने की कोशिश की गई और पैसे इकठ्ठे किए गए। गीता प्रेस ने सर्वधर्म समभाव के लिए सदैव कार्य किया है और अब तक 66 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन 15 भाषाओं में किया है जिसमें 1800 से ज्यादा तरह की किताबें शामिल है। श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गीता प्रेस नई तकनीक अपना रही है और आने वाले दिनों में इंटरनेट से लेकर अमेजॉन तक गीता प्रेस का साहित्य सुलभ हो जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि गीता प्रेस मणियों की खान है जहां शुद्ध प्रकाशन किया जाता है।
तीसरे सत्र में पहली बार किसी साहित्य समागम में भारतीय सेना को लेकर परिचर्चा की गई। सेना से प्रेरणा लेता व सेना को बल देता साहित्य नामक इस सत्र में साहित्य से सेना के सम्बंध और प्रभाव पर चर्चा में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार योगेन्द्र यादव, मेजर जनरल (सेवा निवृत) शिव जसवाल, कर्नल (सेवा निवृत) वी पी एस चौहान ने भाग लिया। इस सत्र का संचालन सुप्रिया श्रीनेत ने किया। इस सत्र में श्री यादव ने कारगिल युद्ध के अपने अनुभव सांझा किए जिनको सुन कर लोगों ने अनेकों बार खड़े होकर तालियां बजाई और परमवीर चक्र विजेता को अपना सलाम भेंट किया। योगेंद्र यादव ने कहा कि स्कूलों में सैनिकों की वीरगाथाएँ पढ़ाई जाएं जिससे कि बच्चों में देशभक्ति का जज़्बा जगे और वे डॉक्टर, इंजीनियर के साथ साथ सैनिक भी बनने की प्रेरणा ले सके। श्रोताओं और पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए परमवीर चक्र विजेता ने कहा कि सैनिक का एक ही धर्म हैं देश की रक्षा और वह मां की सेवा करने के बाद जन्मभूमि की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध रहता है। हथियार तो माध्यम है लड़ाई तो विचारों की होती है, ये बात करते हुए श्री यादव ने कारगिल युद्ध में अपनी वीरता की ऐसी कहानी सुनाई जिसकों सुन कर लोग बेहद भावुक हो उठे और नम आंखों के साथ कई बार खड़े होकर तालियां बजाई। सात गोलियां और दो बमों के हमलों से भी बच कर निकले सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव ने कहा कि बचपन में मैंने वो साहित्य पढ़ा जिसने मुझे सेना में जानें की प्रेरणा दी। इसी के साथ मे० ज० जसवाल तथा कर्नल चौहान ने सेना में भर्ती को लेकर विचार रखे।
सत्र में कवि सम्मेलन/ मुशायरों का वर्तमान स्वरूप, हिन्दी और उर्दू: एक सिक्के के दो पहलू पर परिचर्चा में नवाब मीर जाफ़र अब्दुल्ला, अभिनेता राजा बुंदेला व कनक रेखा चौहान ने भाग लिया और संचालन कवि मनीष शुक्ला ने किया।
पांचवे व अंतिम सत्र में छात्रसंघ की गैरमौजूदगी से समाज और साहित्य पर प्रभाव पर चर्चा में राजमनी पाण्डेय, विश्वकर्मा द्विवेदी, शीतल पाण्डेय, राम सिंह व राधे श्याम सिंह ने भाग लिया और संचालन हर्षवर्धन फाउंडेशन के अध्यक्ष आनन्द वर्धन सिंह ने किया।

दोपहर को शहर के मेयर जयसवाल ने दीप प्रज्वलन के बाद गोरखपुर साहित्य समागम की भूरि-भूरि प्रशंषा करते हुए कहा की इस आयोजन ने शहर को नई ऊंचाइयां देने का कार्य किया है। शाम को गोरखपुर साहित्य समागम का विधिवत समापन करते हुए केन्द्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि वास्तव में ये साहित्य समागम देश में मील का पत्थर साबित होगा क्यूंकि यहाँ पहली बार अंग्रेजियत हावी नहीं रही, सार्क भाषा को शामिल करना, भारतीय भाषा का विशेष सत्र आयोजित करना और सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं की गई। अगले वर्ष फिर आने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गोरखपुर साहित्य समागम से दूसरे बड़े समागमों को सीखने की जरूरत है, सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं किए बिना कोई भी साहित्य समागम कभी भी पूरा हो ही नहीं सकता है।

शाम को सजी कवि सम्मेलन और मुशायरे की महफ़िल में देश के जाने-माने कवियों ने हिस्सा लिया। काव्य पाठ करने वालों में डॉ कुँवर बेचैन, कलीम कैसर, सरिता शर्मा, शाइस्ता सना, मनीष शुक्ला, खुशवीर सिंह शाद शामिल रहे और संचालन शिव ओम अम्बर ने किया। वाह-वाह तथा तालियों की गूँज से संवाद भवन गुंजाएमान रहा। अगले साल मिलने के वायदे के साथ देश का ऐतिहासिक साहित्य समागम का समापन हुआ।

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