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जिला अस्पताल में खून तो है मगर पीने को ठंठा पानी नही

सीएम सिटी के जिला अस्पताल का हाल

गोरखपुर। चिलचिलाती धूप उस पर उमस भरी गर्मी में अपने घर से दूर मरीज के साथ अस्पताल में एक ओर डॉक्टर और दवाओं की तलाश तो वहीं सूखते कंठ के लिए शीतल जल की जरूरत। और अपनी इस जरूरत के लिये भटकते प्यासे तीमारदार। यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं बल्कि सीएम सिटी में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय का है । यूं तो सरकार लाखों करोड़ों रुपया खर्च करके दवाओं और चिकित्सकों की व्यवस्था कर रही है ताकि शहर के अलावा दूर दराज से आने वाले मरीजों को अच्छा इलाज मिल सके लेकिन अस्पताल के बाहर दवा की दुकानों और आस पास के ठेले वालों से ठंठे पानी की बोतलें और पानी का पाउच खरीदने वालों की भीड़ यह बताती है की दवाएं तो दूर यहां पीने का पानी भी मयस्सर नहीं है । पूरे अस्पताल परिसर में ओपीडी के पास लगा वाटर कूलर ही अपनी क्षमता अनुसार रोज आने वाले हजारों मरीजों की प्यास बुझा रहा है। दूसरा वाटर कूलर न्यू बिल्डिंग में लगा है जो अधिकतर की नज़रों से दूर है तो तीसरा वाटर कूलर अस्पताल के ब्लड बैंक के अंदर लगा हुआ है यह भी आम मरीज और उनके तीमारदारों की पहुंच से बहुत दूर है और इसका उपयोग यहां स्टाफ के लोग ही करते हैं । नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक की बात करें तो यहां कभी ब्लड यूनिटों की संख्या शायद ही दहाई के अंक को पार करती रही हो लेकिन आज इस ब्लड बैंक में ब्लड यूनिटों की संख्या 200 के करीब पहुंचने वाली है। कहने का मतलब यह है कि सीएम सिटी के जिला अस्पताल में खून तो मयस्सर है लेकिन शीतल जल अभी मरीज़ और उनके तीमारदारों की पहुंच से बहुत दूर है । इस सम्बंध में एसआईसी डॉ0 राजकुमार गुप्ता ने बताया कि शीतल जल के लिए अस्पताल में दो वाटर कूलर लगे हैं एक ओपीडी के पास और दूसरा न्यू बिल्डिंग में लगा हुआ है जबकि इमरजेंसी के पास का आरओ प्लांट फिलहाल ख़राब है जिसकी मरम्मत कराई जा रही है।

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