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डुमरियागंज के मतदाताओं की चुप्पी से प्रत्याशियों में बढ़ी बेचैनी


उम्मीदवार के नाम की घोषणा में देरी के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी मुख्य लड़ाई में

महफूज़ रिज़वी की क़लम से…..

सिद्धार्थनगर । 12 मई को 60 लोकसभा डुमरियागंज में मतदान होना है, अभी भी यहाँ की तस्वीर बहुत साफ़ नहीं है क्योंकि वोटर कुछ बोल नहीं रहा है ।
डुमरियागंज लोकसभा से सशक्त रूप से 3 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, गठबंधन से आफताब आलम, बीजेपी से जगदंबिका पाल और कांग्रेस से चन्द्रेश उपाध्यय ।
इस लोकसभा सीट के लिए जब तक कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया था तब तक सीधी लड़ाई बीजेपी और गठबंधन से थी लेकिन कांग्रेस से डॉ चन्द्रेश के आने से लड़ाई रोमांचक हो गयी है या यूं कह लीजिए कि उम्मीदवार के नाम की घोषणा में देरी के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी यहाँ मुख्य लड़ाई में शामिल है।
ब्राह्मण चेहरा होने के कारण ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी को जाने वाला ब्राह्मण वोट खिसक जायेगा जिससे बीजेपी को खासा नुकसान होगा। वही अल्पसंख्यक मत तेज़ी से कांग्रेस से जुड़ता नज़र आ रहा है, लेकिन अगर राजनैतिक पंडितों की माने तो 70 फीसदी दलित वोट अगर गठबंधन को मिल गया तो गठबंधन की राह आसान हो सकती है लेकिन आफ़ताब आलम का स्वभाव कहीं न कहीं बाधक बन रहा है।
दूसरी तरफ अगर यहाँ के ब्राह्मण वोट में कांग्रेस सेंध लगाने में सफल होती है तो कांग्रेस यह सीट निकाल सकती है ।
हालाँकि अभी तक ब्राह्मण मतदाताओं की तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन प्रचार के अंतिम दिन प्रियंका गांधी के डुमरियागंज लोकसभा के लिए प्रस्तावित रैली के बाद अगर ब्राह्मण मतों में कांग्रेस की ओर झुकाव देखने को मिला तो फिर कुछ मुस्लिम वोटों के सहारे कांग्रेस की नय्या पार लग सकती है और एक लंबे अंतराल के बाद डुमरियागंज लोकसभा सीट पर ब्राह्मण चेहरा नज़र आ सकता है।
फिलहाल ब्राह्मण वोटों की चुप्पी से इस सीट का समीकरण बीजेपी प्रत्याशी जगदम्बिका पाल के पक्ष में नज़र आ रहे हैं।

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