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डुमरियागंज में स्थानीय व बाहरी के मुद्दे के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी को मिलेगा ब्राह्मण होने का लाभ

कांग्रेस प्रत्याशी ने मोहम्मद मुकीम, मलिक कमाल यूसुफ सरीखे कद्दावर नेताओं को अपने साथ जोड़ कर बदल दिया समीकरण

मनव्वर रिज़वी

स्थानीय व बाहरी के मुद्दे के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी को मिलेगा ब्राह्मण होने का लाभ *कांग्रेस प्रत्याशी डुमरियागंज । लोकसभा चुनाव के नजदीक आते आते नेपाल सीमा से सटे डुमरियागंज लोकसभा सीट की तस्वीर बहुत कुछ साफ होती नजर आने लगी है । भाजपा द्वारा वर्तमान सांसद जगदंबिका पाल का टिकट बहाल रखा गया तो बसपा ने गोरखपुर में पिपराइच विधानसभा सीट पर हारे प्रत्याशी आफ़ताब आलम पर विश्वास जताते हुए उन्हें डुमरियागंज से लोकसभा का प्रत्याशी बना दिया। वहीं आखरी समय तक कांग्रेस पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा न करने से असमंजस की स्थिति बनी रही। कांग्रेस ने यहां एक बड़ा दांव खेलते हुए स्थानीय ब्राह्मण चेहरे को तरजीह देते हुए डॉ0 चंद्रेश उपाध्याय को मैदान में उतारते हुए लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया। वैसे तो डुमरियागंज मुस्लिम बाहुल्य सीट है लेकिन अतीत में देखे तो डुमरियागंज में कभी ब्राह्मणों का वर्चस्व हुआ करता था । पिछले कई चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं ने प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला किया लेकिन 2004 के बाद से परिस्थितियां बदल गई और कभी सांसद बनाने की हैसियत रखने वाले ब्राह्मण मतदाता हाशिये पर चले गए और जगदम्बिका पाल की लगातार दो जीत के बाद इस सीट पर क्षत्रिय नेताओं का बोलबाला हो गया। यही कारण है कि इस सीट को बचाये रखने के लिए जहां तमाम क्षेत्रीय नेता जगदम्बिका पाल के साथ नज़र आ रहे हैं तो वहीं कांग्रेस द्वारा ब्राह्मण प्रत्याशी दिए जाने के बावजूद ब्राह्मणों में असमंजस्य की स्थिति दिख रही है । बात गठबंधन प्रत्याशी आफ़ताब आलम की करें तो राहुल और प्रियंका का क्रेज यहां मुस्लिम मतदाताओं के सर चढ़कर बोल रहा है जो उनके लिए खतरे की घण्टी हो सकती है। आफ़ताब के सजातीय उम्मीदवार होने के बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिम वर्ग खासकर युवा वर्ग को कांग्रेस प्रत्याशी के साथ देखा जा सकता हैं। सबसे पहले आफ़ताब आलम ने यहां से खुद को प्रत्याशी के तौर पर लांच किया और कई महीने बीत जाने के बावजूद डुमरियागंज के तमाम स्थानीय क्षत्रपों को अपने साथ लाने में कामयाब नहीं हो सके । जबकि टिकट मिलने के 2 से 3 दिनों के भीतर ही कांग्रेस प्रत्याशी ने मोहम्मद मुकीम, मलिक कमाल यूसुफ सरीखे कद्दावर नेताओं को अपने साथ जोड़ कर इस लोकसभा के ब्राह्मण मतदाताओं को आने वाले समय में समय के लिए स्पष्ट संकेत दे दिया है कि इस बार आपका बेटा सांसद बन सकता है। दूसरी महत्वपूर्ण बात इस चुनाव में जो उभर कर सामने आ रही है वह जगदंबिका पाल और आफ़ताब आलम का बाहरी होना जबकि कांग्रेस प्रत्याशी की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों डुमरियागंज रही है । डॉ0 चंद्रेश उपाध्याय ने भले ही दूसरे शहरों और विदेश में रहकर पढ़ाई किया लेकिन डॉक्टर बनने के बाद किसी बड़े शहर में बसने के बजाए उन्होंने अपनी कर्मभूमि डुमरियागंज को चुना । बहरहाल चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाली 23 मई को ही पता चलेगा, लेकिन आंकड़ों, जनता के रुझानों और युवाओं के उत्साह को देखते हुए विलंब से प्रत्याशी घोषित करने वाली कांग्रेस स्थानीय डॉ0 चंद्रेश उपाध्याय की उम्मीदवारी के बाद यहां शीर्ष पर नजर आ रही है जबकि दोनों बाहरी प्रत्याशी को दूसरे व तीसरे नम्बर की लड़ाई में देखा जा रहा है।

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