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बीआरडी ऑक्सीजन कांड : डॉक्टर जेल में, सप्लायर बेल पे

बीआरडी ऑक्सीजन कांड के आरोपी जेल में बंद डॉक्टरों के समर्थन में आया आईएमए

योगी सरकार के खिलाफ डॉक्टरों के संगठन नेे खोला मोर्चा

गोरखपर । जिस सप्लायर के ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने से बीआरडी मेडिकल कालेज में सैकड़ों मासूम असमय मौत के गाल में समा गए और इस हादसे ने कई मां से उनकी इकलौती उम्मीदो को छीन लिया। उस ऑक्सीजन सप्लाई फर्म के मनीष भंडारी को कोर्ट से न सिर्फ जमानत मिल गई बल्कि सूत्रों से खबर मिली है कि उसी फर्म को ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका दोबारा मिल गया है जबकि तमाम डॉक्टर अभी जेल की सलाखों के पीछे है जिन पर इलाज में लापरवाही बरतने आरोप है।

सोमवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन कांड में जेल की सलाखों के पीछे कैद डाक्टरों के समर्थन में आईएमए ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया । प्रेस वार्ता के दौरान ऑक्सीजन कांड में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर कफील की पत्नी, मां और भाई उपस्थित थे। वार्ता के दैरान डाक्टरों ने कहा की अगस्त माह के कथित ऑक्सीजन कांड में हमारे 3 साथी डॉ राजीवक्टर मिश्रा, डॉक्टर सतीश एवं डॉक्टर कफील को गिरफ्तार किया गया था । किंतू एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया मानकर हमने भी किसी तरह का प्रतिरोध नहीं किया परंतु उनकी जमानत न होने देना इलाज में लापरवाही से उनके प्राण संकट में डालने से कितनी बड़ी साजिश की बू आ रही है। आप सभी जानते हैं कि प्रदेश सरकार की बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई तो गंभीर आरोपों को क्या मीडिया विपक्षी दलों से बचने के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है । इन डाक्टरों ने समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में अपनी सेवाएं दी और इनके ऊपर अभी तक एक भी आरोप नहीं रहे हैं। ऐसे डॉक्टरों को अनुचित एवं अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जेल में बिना किसी स्पष्ट दोष के विरुद्ध रखना तर्कसंगत एवं न्याय संगत नहीं है । इससे सरकार एवं न्याय व्यवस्था पर लोगों का आक्रोश एवं अविश्वास बढ़ रहा है।

प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय चिकित्सा संघ ने मीडिया के सामने जहां 8 बिंदु रखें । वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करें कि अगस्त माह में हुई बच्चों की मौत स्वाभाविक थी ऑक्सीजन की कमी से हुई।
यदि बच्चों की मृत्यु स्वभाविक थी तो ख्याति प्राप्त डॉक्टरों को गंभीर आरोपों में निरुद्ध करके उन्हें अपमानित एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है मीडिया में इतनी गंभीरता से उठाए गए इस प्रकरण में जिस प्रकार की पूरे देश में विपक्ष सरकार पर निशाना साधा है विगत 8 माह में कोई गंभीर जांच बैठा कर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई इस प्रकार कुल 7 बिंदु सरकार के सम्मुख भारतीय चिकित्सा संघ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे कैद डॉक्टरों के पक्ष में मोर्चा खोल दिया है।

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