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हमको भी कसौटी पर परख कर देखो….

 

एसपी (ट्रैफिक) आदित्य वर्मा पर एक खास पेशकश

*मनव्वर रिज़वी*

गोरखपुर। आम तौर पर किसी सरकारी अधिकारी के लिए कुछ अच्छा लिखना बहुत कठिन होता खासकर जब वो कोई पुलिस वाला हो। हमारी लेखन शैली भी ऐसी नही की किसी के बारे में कुछ अच्छा लिख दूँ। क्योंकि सच लिखना आदत में शुमार है और सच हमेशा कडुआ ही होता है। तो चलिए शुरू करते हैं..…..।

आदित्य वर्मा, पुलिस विभाग का जनता के बीच एक सर्वमान्य और चर्चित नाम, जिन्होंने गोरखपुर के एसपी ट्रैफिक के पद पर रहते हुए पुलिसिंग की एक नई मिसाल क़ायम कर दी।
सूचना क्रांति के इस दौर में इस शक़्स ने फेसबुक और वाट्सएप्प को जागरूकता के लिए इस्तेमाल किया।
अपने नए नए प्रयोग के ज़रिए ये आम जनमानस का ध्यान अपनी और अपनी बातों की ओर खींचने में सफल रहे।
कभी सहकर्मियों को थर्मस बांटते कभी छाता तो कभी हिदायत देते, कभी बच्चों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने स्कूल कालेजों में पहुंच जाते तो कभी किसी युवक को सड़क पर यातायात नियम समझाते और कभी राष्ट्रप्रेम की भावना से बच्चों के हाथों में भारतीय तिरंगा सौंपते, औसत कद काठी के इस इंसान को बड़े पद पर रहने के बावजूद अक्सर शहर के चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था सम्भालते हुए देखा जा सकता है।
M.Tech.और PG Diploma (Marketing Management) की शिक्षा के बाद, एक बैंक अधिकारी के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले आदित्य वर्मा ने कुछ अलग करने की चाह में पुलिस विभाग को चुना। अपनी पुलिस की नौकरी में ज़्यादातर समय वह बीहड़ो में तैनात रहे और निर्भीक होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने के दौरान कई बार कुछ ऐसा कर गए जिस काम को करने से पहले एक आम पुलिस अधिकारी को कई बार सोंचना पड़ता।


हालांकि सामान्य पुलिसिंग की जटिलताओं से जूझते हुए एकाएक ट्रैफिक पुलिसिंग में आना और यहाँ भी मिसाल बन जाना कोई मामूली बात नही है लेकिन आदित्य वर्मा ने गोरखपुर के अपने एक वर्ष के कार्यकाल में यह कर दिखाया । किसी ने सच ही कहा है कि ऊंची उड़ान के लिए पंखों से ज्यादा हौसलों और दृढ़ निश्चय की जरूरत होती है।

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